२०८३ बैशाख ३ गते , विहीबार

विचार / विश्लेषण

Sajilo Khoj

लोकतन्त्रमा पञ्चायतको सम्झना

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नेपालमा बढ्दो वैदेशिक ऋणले औपनिवेशीकरणको खतरा

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व्यवहार कुशल पर्शुराम अग्रवाल

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मानौँ, राजनीति समाज रूपान्तरणको साधन नभएर एउटा धन्दा हो !

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अस्थिर नेपाली राजनीति र विदेशी ऋण

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हिजो राती देखेको सपना

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कोरोना महामारी र देशको वर्तमान राजनीति

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‘के.पी.बा’लाई कसको कस्तो ‘विश्वास’ आवश्यक थियो ?

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चीनको लगानी र देशमा बढ्दो ऋण 

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बहसमा झापाको बीएण्डसी मेडिकल कलेज : कस्तो हुनुपर्छ मेडिकल कलेज ?

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कोभिड-१९ ले व्यापार घाटा

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शिशुपाल बध र ओलीका गाली

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बढिरहेछ महिला हिंसा : प्रहरीको मौनता

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प्रजातन्त्रका उपस्थापक जननायक बी.पी.लाई बुझ्ने किताब

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काँग्रेस पनि उही ड्याङको मूला